मटका का आरंभ भारत में बीते समय से जुड़ा है। मूल रूप से यह उत्पादकों द्वारा कपास मूल्यों की घोषणा के लिए एक तरीका था। फिर यह धीरे-धीरे एक सट्टा के चंगुल में बदल गया । आजकल इंडियन मटका ऑनलाइन भी मौजूद है, यद्यपि यह स्वीकृत नहीं है तथा विभिन्न क्षेत्र में अवैध here है। इसकी चलन निर्बाध रूप से बढ़ रहा है